कुंज-कुंज अति प्रेम से - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (15)

कुंज-कुंज अति प्रेम से - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (15)

कुंज-कुंज अति प्रेम से, कोटि-कोटि रति मैन।
दिनहिं सँवारत रहत हैं, श्री वृंदावन ऐन॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (15)

वृन्दावन की एक-एक कुंज को, कोटि-कोटि रति एवं कामदेव, महाप्रेम में भरकर, नित्य निरंतर सजाते-सँवारते रहते हैं।