श्रीमद्ध वृन्दाटवी कुंजपुंजे नित्यविहारिणौ - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (5.48)

श्रीमद्ध वृन्दाटवी कुंजपुंजे नित्यविहारिणौ - श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (5.48)

श्रीमद्ध वृन्दाटवी कुंजपुंजे नित्यविहारिणौ। गौरश्याम महाश्चर्यकिशोरौ मम जीवनौ।। 5.48।।
- श्री प्रबोधानंद सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (5.48)

श्रीवृन्दावन के निकुंजों में नित्य-विहार करने वाले गौरश्यामात्मक महाश्चर्यमय श्रीयुगलकिशोर ही मेरे जीवन हैं।