मान बड़ाई ईर्ष्या, मन मे भरीं अनेक।
नारायण साधू बने, देखो अचरज एक॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (31)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि जिसके मन में मान-प्रतिष्ठा की चाह और ईर्ष्या के अनेक विकार भरे हुए हैं, वह भी बाहर से साधु का भेष धारण किए हुए है—देखो, यह कैसा महान आश्चर्य है! वास्तविक साधुता तो हृदय की निर्मलता और अहंकार के त्याग में है, न कि केवल बाहरी स्वरूप में।
नारायण साधू बने, देखो अचरज एक॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (31)
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि जिसके मन में मान-प्रतिष्ठा की चाह और ईर्ष्या के अनेक विकार भरे हुए हैं, वह भी बाहर से साधु का भेष धारण किए हुए है—देखो, यह कैसा महान आश्चर्य है! वास्तविक साधुता तो हृदय की निर्मलता और अहंकार के त्याग में है, न कि केवल बाहरी स्वरूप में।

