लता लता सब कलपतरु, पारिजात सब फूल।
सहज एक रस रहत हैं, झलकत जमुना कूल॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (14)
यहाँ की एक-एक लता कल्पवृक्ष है और एक-एक पुष्प पारिजात है, जो श्री यमुना जी के तट पर सतत एकरस झिलमिलाते रहते हैं; अर्थात् इनकी शोभा कभी मंद नहीं होती।
सहज एक रस रहत हैं, झलकत जमुना कूल॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (14)
यहाँ की एक-एक लता कल्पवृक्ष है और एक-एक पुष्प पारिजात है, जो श्री यमुना जी के तट पर सतत एकरस झिलमिलाते रहते हैं; अर्थात् इनकी शोभा कभी मंद नहीं होती।

