और द्वार जाओ ना, अनन्य बनो बामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (47)

और द्वार जाओ ना, अनन्य बनो बामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (47)

और द्वार जाओ ना, अनन्य बनो बामा।
त्रिगुण, त्रिताप, त्रिकर्म काटे श्यामा॥

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (47)

जीव को अनन्य आश्रय एकमात्र श्रीराधा काही ग्रहण करना चाहिये। द्वार द्वार भटकने से क्या लाभ? जीव के त्रिगुण (सतोगुण, रजोगुण व तमोगुण) त्रिताप (दैहिक,दैविक, भौतिक) त्रिक कर्म (संचित, प्रारब्ध, क्रियमाण) शरण में जाते ही समाप्त हो जायेंगे।