विपिन राज राजत दिनहिं, बरषत आनँद पुंज।
लुब्ध सुगन्ध पराग रस, मधुप करत मधु कुंज॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (16)
सर्वोत्कृष्ट श्री वृन्दावन परमानन्द की वर्षा करता हुआ सर्वोपरि विराजमान है, जहाँ दिव्य सुगंध और पुष्पों के पराग से आकृष्ट भ्रमर मधुर-मधुर गुंजार करते रहते हैं।
लुब्ध सुगन्ध पराग रस, मधुप करत मधु कुंज॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (16)
सर्वोत्कृष्ट श्री वृन्दावन परमानन्द की वर्षा करता हुआ सर्वोपरि विराजमान है, जहाँ दिव्य सुगंध और पुष्पों के पराग से आकृष्ट भ्रमर मधुर-मधुर गुंजार करते रहते हैं।

