हेममयी अवनी सहज, रतन खचित बहु रंग।
चित्रित चित्र विचित्र गति, छबि की उठति तरंग॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (11)
श्री वृन्दावन की भूमि सहज स्वरूप से ही स्वर्णमयी है, जिसमें नाना रंगों के अद्भुत रत्न जड़े हैं। अद्भुत भाँति से विलक्षण चित्र चित्रित हैं, जिनमें सौंदर्य की तरंगें सतत उठती रहती हैं।
चित्रित चित्र विचित्र गति, छबि की उठति तरंग॥
- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (11)
श्री वृन्दावन की भूमि सहज स्वरूप से ही स्वर्णमयी है, जिसमें नाना रंगों के अद्भुत रत्न जड़े हैं। अद्भुत भाँति से विलक्षण चित्र चित्रित हैं, जिनमें सौंदर्य की तरंगें सतत उठती रहती हैं।

