वेद पुराण हूँ पढै - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (73)

वेद पुराण हूँ पढै - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (73)

वेद पुराण हूँ पढै, करैं सुकर्म संजोई।
व्यास जु जनम अनन्य बिनु, एकौ गति नहीं होइ॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धान्त की साखी (73)

यदि कोई अनन्त बार वेदों का अध्ययन कर ले अथवा अनेक सुकर्म कर ले, तो भी अनन्य भक्ति के बिना उसकी एक भी गति नहीं होती; अर्थात सब कुछ निरर्थक है।