नारायण संसार में, भूपति भये अनेक।
मैं मेरी करते रहे, लै न गये तृण एक॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (17)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं—‘भैया, यह संसार क्षणभंगुर है। इस जगत में अनन्त काल से असंख्य राजा होते आए हैं; वे निरन्तर केवल “मैं” और “मेरी” में ही उलझे रहे। परन्तु कोई भी एक तृण मात्र तक अपने साथ नहीं ले जा सका। इसलिए तू भजन कर।’
मैं मेरी करते रहे, लै न गये तृण एक॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (17)
श्री नारायण स्वामी जी कहते हैं—‘भैया, यह संसार क्षणभंगुर है। इस जगत में अनन्त काल से असंख्य राजा होते आए हैं; वे निरन्तर केवल “मैं” और “मेरी” में ही उलझे रहे। परन्तु कोई भी एक तृण मात्र तक अपने साथ नहीं ले जा सका। इसलिए तू भजन कर।’

