डरावे हरिहूँ को भौंह तानी, कृपा ते रसिकन अब मैं जानी।
कृपालु नहिं कोउ जस राधारानी। 'कृपालु' की भी सुधि लो राधारानी।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी-1 (82)
श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं "रसिकों की कृपा से उन्हें यह ज्ञात हुआ की श्री कृष्ण नित्य ही श्री राधा की शरण में रहते हैं एवं जब श्रीराधा अपनी भौहें तान लेती हैं तब श्री हरि भी डरते हैं । हे राधारानी आप हमारी भी सुध लो, श्री किशोरी जी जैसा कृपालु कहीं कोई नहीं है।"
कृपालु नहिं कोउ जस राधारानी। 'कृपालु' की भी सुधि लो राधारानी।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी-1 (82)
श्री कृपालु जी महाराज कहते हैं "रसिकों की कृपा से उन्हें यह ज्ञात हुआ की श्री कृष्ण नित्य ही श्री राधा की शरण में रहते हैं एवं जब श्रीराधा अपनी भौहें तान लेती हैं तब श्री हरि भी डरते हैं । हे राधारानी आप हमारी भी सुध लो, श्री किशोरी जी जैसा कृपालु कहीं कोई नहीं है।"

