हमारी लाड़िली ही इष्ट।
नाम इनकौ जपत नित, कछु ह्वै न सकत अनिष्ट।।
अलि किशोरी बसत बन इन, सेइ लेत उच्छिष्ट।
- श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली
हमारी इष्टदेव तो केवल लाडिली सरकार श्री राधारानी ही हैं, जिनका नित्य नाम जप करने से कभी भी कुछ भी अनिष्ठ (अमंगल) नहीं हो सकता। श्री किशोरी अली कहते हैं कि हम तो इनके धाम वृन्दावन में ही सदा बसते हैं और इन्ही का उच्छिष्ट (प्रसाद) सेवन करते हैं।
नाम इनकौ जपत नित, कछु ह्वै न सकत अनिष्ट।।
अलि किशोरी बसत बन इन, सेइ लेत उच्छिष्ट।
- श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली
हमारी इष्टदेव तो केवल लाडिली सरकार श्री राधारानी ही हैं, जिनका नित्य नाम जप करने से कभी भी कुछ भी अनिष्ठ (अमंगल) नहीं हो सकता। श्री किशोरी अली कहते हैं कि हम तो इनके धाम वृन्दावन में ही सदा बसते हैं और इन्ही का उच्छिष्ट (प्रसाद) सेवन करते हैं।

