वृंदावन को वास करि - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (36)

वृंदावन को वास करि - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (36)

वृंदावन को वास करि, छाँड़ि जगतकी आस।
व्यास सु रसिकन हिल मिले, ह्वै नव जनम प्रकाश॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (36)

 अरे मन! जगत की आस को त्याग कर वृन्दावन में वास कर; रसिक संतों के संग से नव-जन्म का प्रकाश प्रकट होता है।