मेरे विषै विसन वर वाम - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की बानी, सिद्धांत के पद (132)

मेरे विषै विसन वर वाम - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की बानी, सिद्धांत के पद (132)

मेरे विषै विसन वर वाम, तन गोरी मन भोरी नवल किशोरी राधा नाम |
निस बासर जागत सोवत चितवत अंग अंग अभिराम |

- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की बानी, सिद्धांत के पद (132)

सर्वोपरि प्रेमियों की चरण रज यह वृन्दावन रज के प्रताप से मेरे प्राण और मन के विषय एवं विसन सर्वश्रेस्ठ वर वाम एक मात्र श्री नित्य बिहारिणी जू हो गयी हैं। वह छिन्न छिन्न नव नवायमान नव किशोरिता से भरी हैं, गौर छवि वारी हैं , अति भोरी हैं और राधा उनका नाम है। उनके अंग अंग को हम सोते जागते सतत निहारते रहते हैं।