व्यास रसिकजन ते बड़े, व्रज तजि अनत न जाहिं।
वृंदावन के स्वपच लौं, जूँठनि माँगैं खाँहि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (40)
श्री हरिराम व्यास कहते हैं, भक्तों में सर्वोपरि रसिक भक्त हैं जो श्री ब्रज धाम कभी नहीं छोड़ते। यहां तक कि भोजन के लिए भी मांग कर स्वपच का झूठन खाना उचित है, परंतु श्री वृंदावन धाम को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
वृंदावन के स्वपच लौं, जूँठनि माँगैं खाँहि॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (40)
श्री हरिराम व्यास कहते हैं, भक्तों में सर्वोपरि रसिक भक्त हैं जो श्री ब्रज धाम कभी नहीं छोड़ते। यहां तक कि भोजन के लिए भी मांग कर स्वपच का झूठन खाना उचित है, परंतु श्री वृंदावन धाम को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

