जनम-जनम जिनके सदा - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (7)

जनम-जनम जिनके सदा - श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (7)

जनम-जनम जिनके सदा, हम चाकर निसि भोर।
त्रिभुवन पोषन सुधाकर, ठाकुर जुगल किसोर॥

- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (7)

जन्म-जन्म से हम जिनके नित्य चाकर हैं—सवेरे से संध्या तक ही नहीं, अपितु प्रत्येक क्षण—वे ही त्रिभुवन का पोषण करने वाले युगल किशोर श्री श्यामा–श्याम हैं।