"रसघन मोहन मूर्ति, विचित्रकेलि-महोत्सवोल्लसितम्।
राधा-चरण विलोदित, रुचिर शिखण्डं-हरि वन्दे ।।"
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (200)
मैं उन रस-घन-मोहन-मूर्ति हरि (श्रीकृष्ण) की वन्दना करती हूँ जो विचित्र केलि-महोत्सव से उल्लसित हैं, जिनका मोर पंख इस समय श्री राधा चरणों में लुंठित हो रहा है।
राधा-चरण विलोदित, रुचिर शिखण्डं-हरि वन्दे ।।"
- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (200)
मैं उन रस-घन-मोहन-मूर्ति हरि (श्रीकृष्ण) की वन्दना करती हूँ जो विचित्र केलि-महोत्सव से उल्लसित हैं, जिनका मोर पंख इस समय श्री राधा चरणों में लुंठित हो रहा है।

