व्यास मिठाई विप्र की - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (44)

व्यास मिठाई विप्र की - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (44)

व्यास मिठाई विप्र की, तामें लागै आगि।
वृन्दावन के स्वपच की, जूठनि खैयै मागि॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (44)

अनन्य रसिक श्री हरिराम व्यास जी वृन्दावन अथवा वृन्दावन के वासियों की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि यदि किसी कर्मकांडी विद्वान (विप्र) अथवा वृन्दावन से विमुख ब्राह्मण द्वारा मिष्ठान्न भी प्राप्त हो, तो उसे त्याग देना चाहिए। इसके विपरीत, यदि श्री वृन्दावन धाम के किसी चांडाल (स्वपच) की जूठन भी मिल जाए, तो उसे माँगकर ग्रहण करना परम कल्याणकारी है।