कुंज बिहारीनि बाल कों, सेवें हित सों नित्त।
बिघन न आवें तास कों, तन में मन में चित्त॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (272)
जो बड़भागी जन बड़े ही हित से (प्रेमपूर्वक) श्री कुञ्ज-विहारिणी बाल—श्री राधारानी—की सतत सेवा करते हैं, उनके तन, मन और चित्त में किसी प्रकार का विघ्न नहीं आ सकता।
बिघन न आवें तास कों, तन में मन में चित्त॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (272)
जो बड़भागी जन बड़े ही हित से (प्रेमपूर्वक) श्री कुञ्ज-विहारिणी बाल—श्री राधारानी—की सतत सेवा करते हैं, उनके तन, मन और चित्त में किसी प्रकार का विघ्न नहीं आ सकता।

