विपिन धाम आंनद कौं - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (20)

विपिन धाम आंनद कौं - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (20)

विपिन धाम आनंद कौ, चतुरई चित्रित ताहि।
मदन केलि संपति सदा, तिहि करि पूरन आहि॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (20)

श्री वृन्दावनधाम सच्चिदानन्दमय है, जिसे स्वयं चतुराई ने ही सजाया-संवारा है। श्री प्रियालाल की रस-केलि के अनुरूप एवं अनुकूल सम्पदा वहाँ सदा भरपूर है।