लतन तरें ठाड़ो कबूं - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (162)

लतन तरें ठाड़ो कबूं - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (162)

लतन तरें ठाड़ो कबूं, कबहूँ यमुना तीर।
नारायण नैनन बसी, मूरति श्याम शरीर॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (162)

श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि मेरे नैनों में श्यामसुन्दर की वह मूर्ति सदा बसी हुई है—कभी वे वृन्दावन की कुञ्ज-लताओं के मध्य खड़े दिखाई देते हैं, तो कभी यमुना-तट पर विराजमान होते हैं।