जै जै बिपिन बिहारी जू।
तन मन बिलसत अति सुखरासी रोम रोम हितकारी जू ॥ [1]
अति आनंद भरी रसमाती छिन हूँ होति न न्यारी जू।
श्रीललितकिसोरी की निजु जीवनि कुंजबिहारिनि प्यारी जू ॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (62)
श्री वृंदावन धाम एवं बिहारी जू अर्थात जो श्री वृंदावन में रमण करते हैं, विहार करते हैं, हमारे युगल सरकार, उनकी जय हो।
समस्त सुखों की राशि, रोम रोम से हितकारी श्री वृंदावन प्रकट रूप से विराजमान है। [1]
इस श्रीवन में अत्यंत आनंद से भरी, रस में उन्मत्त रहने वाली, सबसे न्यारी प्यारी श्रीप्रिया जू का वियोग एक क्षण को भी नहीं होता।
श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि उनकी निज जीवन धन संपतिं सबकुछ केवल एक मात्र कुंज बिहरिनी श्री प्यारी जू हैं । [2]
तन मन बिलसत अति सुखरासी रोम रोम हितकारी जू ॥ [1]
अति आनंद भरी रसमाती छिन हूँ होति न न्यारी जू।
श्रीललितकिसोरी की निजु जीवनि कुंजबिहारिनि प्यारी जू ॥ [2]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (62)
श्री वृंदावन धाम एवं बिहारी जू अर्थात जो श्री वृंदावन में रमण करते हैं, विहार करते हैं, हमारे युगल सरकार, उनकी जय हो।
समस्त सुखों की राशि, रोम रोम से हितकारी श्री वृंदावन प्रकट रूप से विराजमान है। [1]
इस श्रीवन में अत्यंत आनंद से भरी, रस में उन्मत्त रहने वाली, सबसे न्यारी प्यारी श्रीप्रिया जू का वियोग एक क्षण को भी नहीं होता।
श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि उनकी निज जीवन धन संपतिं सबकुछ केवल एक मात्र कुंज बिहरिनी श्री प्यारी जू हैं । [2]

