"तेजोमय इदं रम्यम् अदृश्यं चर्मचक्षुषा”
- ब्रह्म संहिता
श्रीकृष्ण कहते हैं " मैं वृंदावन धाम को एक क्षण के लिए भी नहीं छोड़ता, यह वृंदावन धाम दिव्य है और मायिक दृष्टि से इसको देखना असंभव है। "
- ब्रह्म संहिता
श्रीकृष्ण कहते हैं " मैं वृंदावन धाम को एक क्षण के लिए भी नहीं छोड़ता, यह वृंदावन धाम दिव्य है और मायिक दृष्टि से इसको देखना असंभव है। "

