"पंचयोजनमेवास्ति वनं मे देह रूपकम” - ब्रह्म संहिता

"पंचयोजनमेवास्ति वनं मे देह रूपकम” - ब्रह्म संहिता

"पंचयोजनमेवास्ति वनं मे देह रूपकम”
- ब्रह्म संहिता

भगवान श्री कृष्ण बोले "पांच योजन में फैला यह वृन्दावन मेरा श्रीविग्रह (देह) ही है”।