गावत वृंदा विपिन गुन - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (23)

गावत वृंदा विपिन गुन - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (23)

गावत वृंदा विपिन गुन, नवल लाड़िली लाल।
सुखद लता फल फूल द्रुम, अद्भुत परम रसाल॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (23)

 नित्य-नवल श्री लाड़िली–लाल स्वयं वृन्दावन का गुणगान करते रहते हैं जहाँ की लताएँ, पुष्प, फल और वृक्ष अद्भुत रस-रीति से परम सुखद एवं पूर्ण हैं।