हमारैं माई राधा नाम की टेक - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हमारैं माई राधा नाम की टेक - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हमारैं माई राधा नाम की टेक ।
राधा नाम उचारत मुख ते, जद्यपि ललित अनेक ॥ [1]
राधा नाम होहिं जिहिं ग्रन्थहि, पढ़त और नहीं नेंक ।
राधा नाम सुनैं निजु श्रवननि, कहै जु कोउ कितेक ॥ [2]
राधा नाम जपैं हम निशि-दिन, और दिए सब छेक ।
अली किशोरी राधा गावैं, लीनौं व्रत यह एक ॥ [3]

- श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हम केवल श्री राधा नाम का जाप करने की प्रतिज्ञा करते हैं। श्री कृष्ण जो सभी रसिकों के सिरमौर है वो भी श्री राधा का नाम ऊँचे स्वर से पुकारते हैं।  [1]

जहाँ श्री राधा का नाम नहीं है, हम उस शास्त्र या वेद का गलती से भी अध्ययन नहीं करते हैं। जो कोई भी श्री राधा का नाम लेता है, हम उसे ध्यान से अपने कानों से सुनते हैं। [2]

दिन-रात हम अन्य सभी नामों का त्याग करते हुए, एक मात्र श्री राधा के आनंदित नाम का जप करते हैं। श्री किशोरी अली कहते हैं, मैंने "श्री राधा" नाम का जाप करने व्रत लिया है। [3]