जिकरि फ़िकरि सब छाँड़ि कै, ललित केली गुन गाव।
श्री वृन्दावन में बसि रहौ, नाँहिन और उपाव॥
- श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (16)
सब प्रकार की (लौकिक-अलौकिक ) चर्चाओं और चिताओं का परित्याग करके श्रीवृन्दावन में अखण्ड वास करते हुए श्रीप्रिया-प्रियतम की नित्य रसमयी केली-लीलाओं का यशोगान करते रहना चाहिये । हमारी दृष्टि में इसके अतिरिक्त सच्चे सुख की प्राप्ति का अन्य कोई उपाय नहीं है।
श्री वृन्दावन में बसि रहौ, नाँहिन और उपाव॥
- श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (16)
सब प्रकार की (लौकिक-अलौकिक ) चर्चाओं और चिताओं का परित्याग करके श्रीवृन्दावन में अखण्ड वास करते हुए श्रीप्रिया-प्रियतम की नित्य रसमयी केली-लीलाओं का यशोगान करते रहना चाहिये । हमारी दृष्टि में इसके अतिरिक्त सच्चे सुख की प्राप्ति का अन्य कोई उपाय नहीं है।

