(राग जंगला)
वृन्दावनसों नेह लगैये |
काम क्रोध आदिक जमदूतन मुख विदुकाय परमपद पैये ||
रटिरटि राधारमन ध्यानधरि तुरत पाप तनताप नसैये |
ललितकिशोरी कुंजगलिन लुढि विगरी जन्म अनेक वनैये ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२४१)
अरे मन श्री वृंदावन धाम से नेह बढ़ा। काम क्रोध में ही तेरा जीवन बीता जा रहा है और यमदूत का ही मरने के पश्चात दर्शन करना होगा, समय बीता जा रहा है, अब श्री प्रिया लाल की नित्य विहार स्थली श्री वृंदावन से प्रेम बढ़ा कर परम पद प्राप्त कर। राधा रमण का ध्यान और उनके नाम का ध्यान सहित रटन करने से अनेक पापों का नाश कर। श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि श्री वृंदावन कि कुंज गलियों में नित्य विहरन कर अपने अनंत जन्मों कि बिगड़ी बनाले।
वृन्दावनसों नेह लगैये |
काम क्रोध आदिक जमदूतन मुख विदुकाय परमपद पैये ||
रटिरटि राधारमन ध्यानधरि तुरत पाप तनताप नसैये |
ललितकिशोरी कुंजगलिन लुढि विगरी जन्म अनेक वनैये ||
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (२४१)
अरे मन श्री वृंदावन धाम से नेह बढ़ा। काम क्रोध में ही तेरा जीवन बीता जा रहा है और यमदूत का ही मरने के पश्चात दर्शन करना होगा, समय बीता जा रहा है, अब श्री प्रिया लाल की नित्य विहार स्थली श्री वृंदावन से प्रेम बढ़ा कर परम पद प्राप्त कर। राधा रमण का ध्यान और उनके नाम का ध्यान सहित रटन करने से अनेक पापों का नाश कर। श्री ललित किशोरी जी कहते हैं कि श्री वृंदावन कि कुंज गलियों में नित्य विहरन कर अपने अनंत जन्मों कि बिगड़ी बनाले।

