य: कृष्ण: सापि राधा च या राधा कृष्ण एव सः ।
एकं ज्योतिर्दिधा भिन्नं राधामाधवरूपकम् ॥
- वृहद् ब्रह्म संहिता (4.25) [नारद पंचरात्र के अन्तर्गत]
जो श्रीकृष्ण हैं, वही श्रीराधा हैं और जो श्री राधा हैं, वही श्रीकृष्ण हैं, राधा-माधव के रूप में एक ही ज्योति दो प्रकार से प्रकट है।
एकं ज्योतिर्दिधा भिन्नं राधामाधवरूपकम् ॥
- वृहद् ब्रह्म संहिता (4.25) [नारद पंचरात्र के अन्तर्गत]
जो श्रीकृष्ण हैं, वही श्रीराधा हैं और जो श्री राधा हैं, वही श्रीकृष्ण हैं, राधा-माधव के रूप में एक ही ज्योति दो प्रकार से प्रकट है।

