बताओ राधे ! जाऊँ काके द्वार ?|
साधनहीन दीन अपनावत, ऐसो कौन उदार |
( प्रेम रस मदिरा दैन्य – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
हे मोहन मोहिनी राधे ! तुम ही बताओ, तुम्हें छोड़कर यह दीन भिखारी अब और किसके द्वार पर जाय | तुम्हारे सिवा ऐसा कौन उदार है, जो बिना साधन के ही दीनों को अपना ले |
साधनहीन दीन अपनावत, ऐसो कौन उदार |
( प्रेम रस मदिरा दैन्य – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
हे मोहन मोहिनी राधे ! तुम ही बताओ, तुम्हें छोड़कर यह दीन भिखारी अब और किसके द्वार पर जाय | तुम्हारे सिवा ऐसा कौन उदार है, जो बिना साधन के ही दीनों को अपना ले |

