यः शृणोति वरारोहे - वराह पुराण - (152.17)

यः शृणोति वरारोहे - वराह पुराण - (152.17)

यः शृणोति वरारोहे माथुरं मम मण्डलम् ।
अन्येनोच्चारितं शश्वत्सोऽपि पापैः प्रमुच्यते ।।

- वराह पुराण - 152.17

जो मेरे ब्रज मंडल की महिमा सुनता है वह समस्त पापों से मुक्त रहता है।