महाप्रलै अबही भई - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी,साखी (144)

महाप्रलै अबही भई - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी,साखी (144)

महाप्रलै अबही भई, वृंदावन करि वास।
पर्यौ रहै निहचिंत मन, छाँड़ि जगतकी आस॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी,साखी (144)

हे मन! यदि अब तक भक्ति-रस की सिद्धावस्था प्राप्त नहीं हुई, तो तेरे लिए महाप्रलय वर्तमान क्षण में ही उपस्थित है। अतः बिना विलंब किए श्री वृन्दावन धाम में अखंड वास कर। संपूर्ण संसार की मिथ्या आशाओं को त्याग कर निश्चिंत भाव से यहाँ की दिव्य रज का आश्रय ग्रहण कर।