हमैं तौ इक आस किशोरीजू की - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हमैं तौ इक आस किशोरीजू की - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हमैं तौ इक आस किशोरीजू की।
रूप-माधुरी निरखें निसि-दिन, छबि-निधि गोरी जू की।
भूख लगै तौ सीथ प्रसादी, पावैं भोरी जू की।
अली किशोरी करें खवासी, पिय-चित-चोरी जू की।

- श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली

हमें तो एक आस श्री किशोरी जी से है। हर क्षण हम श्री राधारानी की गोरी छवि निधि की रूप माधुरी का निरंतर सेवन करते हैं । यदि भूख लगती है तो उन्हीं (भोरी जू) की प्रसादी पा लेते हैं। श्री अली किशोरी कहते हैं कि पिय श्री कृष्ण का चित्त चुराने वाली श्री राधा रानी की चाकरी नित्य ही प्रियतम करते हैं।