नारायण व्रज भूमिकूं - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (08)

नारायण व्रज भूमिकूं - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (08)

नारायण व्रज भूमिकूं, सुरपति नावें माथ।
जहां आय गोपी भये, श्रीगोपेश्वर नाथ॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (08)

श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि वृन्दावन की भूमि समस्त देवताओं द्वारा भी वंदनीय है, जिसे वे अपने मस्तक से लगाकर रखते हैं; जहाँ स्वयं गोपेश्वर भगवान् शंकर गोपी-रूप धारण करके प्रकट हुए हैं।