करे कमलमद्भुतं - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (171)

करे कमलमद्भुतं - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (171)

करे कमलमद्भुतं भमयतोर्मिथोंसार्पित,
स्फुरत्पुलक दोर्लता युगलयो: स्मरोन्मत्तयो: ।
सहास-रास-पेशलं मद करीन्द्र-भङ्गीशतै-
र्गर्ति रसिकयोर्द्वयो: स्मरत चारु वृन्दावने।।

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (171)

अद्भुत कमल को हाथों में घुमाते हुए, एवं परस्पर स्कन्धों पर पुलकित भुजलता अर्पित किये हुए, कामोन्मत्त, वृन्दावन-विहारी-रसिक युगल की सहास-रस-सुन्दर, शत-शत मदपूर्ण करीन्द्र-गतिमान् भङ्गिमाओं के समान गति का (हे मेरे मन !) तू स्मरण कर?