आज इन दोउन पै बलिहारी - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवदुलहीन लीला (17)

आज इन दोउन पै बलिहारी - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवदुलहीन लीला (17)

(राग जयजयवन्ती)
आज इन दोउन पै बलिहारी ।
नंदलाल रतिपति विशाल छबि, चंद्रवदन वृषभानुदुलारी ।।
बैठे कुंजभवन बतरावत, उपजावत सुख प्रीतम प्यारी ।
नारायण उपमा कहा दीजै, मैं अपने मन बहुत बिचारी ।।

- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, नवदुलहीन लीला (17)

आज हम दिव्य दंपति श्री राधा कृष्ण पे अपने आप को न्योछावर करते हैं । श्याम सुंदर की अनुपम सुंदरता लाखों "कामदेवों" को लज्जित करने वाली है और श्री राधा का सुंदर चेहरा चंद्रमा को लज्जित कर रहा है । दोनों ब्रज के कुंज भवन में अपनी अमृतमयी बातों के साथ दिव्य प्रेम की मीठी अमृत वर्षा कर रहे हैं । श्री नारायण स्वामी कहते हैं, मेरे सभी प्रयासों के बाद भी, मुझे दिव्य युगल की सुंदरता की तुलना करने के लिए, कोई भी उपमा नहीं सूझ रहा है ।