सहज विराजत एक रस - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (108)

सहज विराजत एक रस - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (108)

सहज विराजत एक रस, वृंदावन निज धाम।
ललितादिक सखियन सहित, क्रीडत स्यामास्याम॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (108)

श्री राधावल्लभ लाल का निज धाम श्री वृन्दावन अनादि काल से सहज शोभा सहित नित्य विद्यमान है, जहाँ अपनी ललितादिक सखियों सहित युगल सदा केली-परायण रहते हैं।