सेवैं नित्य सरुप कौं - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (285)

सेवैं नित्य सरुप कौं - श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (285)

सेवैं नित्य सरुप कौं, और वृन्दावन चंद।
अँग सँग निरखैं केलि सुख, सदा रहैं आनंद॥

- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत की साखी (285)

हम सदाकाल श्री वृन्दावन-चन्द्र में अखण्ड वास करते हुए नित्य-स्वरूप श्री लाड़ली–लाल की केलि-सुख का निरन्तर सेवन कर सतत आनन्द में निमग्न रहते हैं।