साधुन की सेवा कियैं - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (82)

साधुन की सेवा कियैं - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (82)

साधुन की सेवा कियैं, हरि पावत संतोष।
साधु विमुख जे हरि भजैं, व्यास बढ़ै दिन रोष॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (82)

साधुओं और संतों की सेवा करने से ही श्री हरि को परम संतोष प्राप्त होता है। इसके विपरीत, जो लोग संतों से विमुख होकर केवल हरि का भजन करना चाहते हैं, श्री व्यास जी कहते हैं कि उनका रोष अनुदिन बढ़ता ही रहता है।