तेरे हैं अनन्त पाप - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (34)

तेरे हैं अनन्त पाप - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (34)

तेरे हैं अनन्त पाप कह ब्रज बामा।
याते धीरे-धीरे मन भायेंगी श्यामा॥

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (34)

भावार्थ - हे जीव ! अनादिकाल से अनन्तानन्त पाप करने के कारण तेरा मन अत्यंत मलिन हो चुका है अतएव (साधना द्वारा अंतःकरण शुद्धि की मात्रानुसार) श्री राधा धीरे-धीरे ही मन को अच्छी लगेंगी, एकाएक नहीं।