(राग सारंग, एकताल)
ब्रज भूमि मोहिनी मैं जानि।
मोहनि कुंज मोहन वृन्दावन मोहनि जमुना पानी।
मोहनि नारि सकल गोकुल की, बोलत मोहनी वानी।
श्रीभट्ट के प्रभु मोहन नागर, मोहनी राधा रानी।।
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (04)
अब मैंने जाना है की ब्रज भूमि मोहिनी है |कुञ्ज भी मोहिनी है, वृन्दावन भी मनमोहन और यमुना रस रानी भी मोहिनी है। समस्त नारी ब्रज की मोहिनी हैं, एवं वह मोहनी (अमृतमयी) वाणी ही बोलती हैं। श्री भट्ट देवाचार्य जी महाराज कहते हैं कि हमारे प्रभु नटवर लाल भी मनमोहन वाले हैं एवं श्री राधारानी भी मोहिनी हैं।
ब्रज भूमि मोहिनी मैं जानि।
मोहनि कुंज मोहन वृन्दावन मोहनि जमुना पानी।
मोहनि नारि सकल गोकुल की, बोलत मोहनी वानी।
श्रीभट्ट के प्रभु मोहन नागर, मोहनी राधा रानी।।
- श्री भट्ट देवाचार्य, युगल शतक (04)
अब मैंने जाना है की ब्रज भूमि मोहिनी है |कुञ्ज भी मोहिनी है, वृन्दावन भी मनमोहन और यमुना रस रानी भी मोहिनी है। समस्त नारी ब्रज की मोहिनी हैं, एवं वह मोहनी (अमृतमयी) वाणी ही बोलती हैं। श्री भट्ट देवाचार्य जी महाराज कहते हैं कि हमारे प्रभु नटवर लाल भी मनमोहन वाले हैं एवं श्री राधारानी भी मोहिनी हैं।

