न्यारौ चौदह लोक तें - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (110)

न्यारौ चौदह लोक तें - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (110)

न्यारौ चौदह लोक तें, वृन्दावन निज भौन।
तहाँ न कबहूँ लगत है, महाप्रलय की पौन॥

- श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (110)

युगल का निज धाम यह श्री वृन्दावन चौदह लोकों से विलक्षण है, जिसे महाप्रलय की पवन स्पर्श करने में भी असमर्थ है।