व्यास बसेरौ कुंजमें, वंसीवट की छाँह।
हरि भगतन कौ आसरौ, राधावर की वाँह॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (33)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं— “मेरा बसेरा वृन्दावन की कुंजों में, बंशीवट की छाँव में है। मेरा आसरा हरि-भक्त हैं और राधावर की बाँह है।”
हरि भगतन कौ आसरौ, राधावर की वाँह॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, साखी (33)
श्री हरिराम व्यास जी कहते हैं— “मेरा बसेरा वृन्दावन की कुंजों में, बंशीवट की छाँव में है। मेरा आसरा हरि-भक्त हैं और राधावर की बाँह है।”

