राधा मेरी गति मति राधा पद मेरी रति ।
श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है। मेरा प्रेम केवल श्री राधा रानी के चरण कमलों तक ही सीमित है।
राधा पति मेरी गति वारौं कोटी रति पति ।
श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है, और मैं उन पर करोड़ों करोड़ों कामदेवों को न्योछावर करता हूं।
श्यामा श्याम सुख राशि हौं तो हौं युगल दासी ।
श्री राधा कृष्ण आनंद की असीमित राशि हैं। मैं दिव्य युगल की दासी हूँ।
राधा मेरी ठकुरानी वृंदावन रजधानी ।
श्री राधा मेरी स्वामिनी हैं, उनकी राजधानी वृंदावन है।
राधा मेरी ठकुरानी मैं तो राधा की दीवानी ।
मैं अपनी स्वामिनी श्री राधा रानी के प्रेम में डूबी हुई हूं।
राधा मेरी ठकुरानी ब्रह्म करे अगवानी ।
पूर्ण ब्रह्म श्री कृष्ण मेरी स्वामिनी श्री राधा की अगवानी करते हैं।
राधा मेरी ठकुरानी सेवें शम्भु शुक ज्ञानी ।
ज्ञानियों में अग्रगण्य भगवान शिव और शुकदेव जैसे महान अधिकारी भी उनकी सेवा में उपस्थित हैं ।
राधा मेरी ठकुरानी ज्ञानी विज्ञानी अज्ञानी ।
जो श्री राधा से प्रेम नहीं करते वे ज्ञानी होते हुए भी महान मूर्ख हैं।
राधा मेरी ठकुरानी ऊँचे महलन रानी ।
मेरी स्वामिनी श्री राधा रानी एक भव्य और ऊंचे महल में निवास करती हैं।
राधा मेरी ठकुरानी नेति कहे वेद वानी ।
वेद यह कहने में असमर्थ हैं कि श्री राधा तत्व क्या है, वेद भी नेति नेति कहकर अपने को असमर्थ बताते हैं ।
राधा मेरी ठकुरानी स्वामिनी 'कृपालु' मानी ।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी कहते हैं कि मैंने उन्हें अपनी स्वामिनी के रूप में स्वीकार कर चुका हूं ।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (75)
श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है। मेरा प्रेम केवल श्री राधा रानी के चरण कमलों तक ही सीमित है।
राधा पति मेरी गति वारौं कोटी रति पति ।
श्री राधा ही मेरे जीवन की अंतिम गति है, और मैं उन पर करोड़ों करोड़ों कामदेवों को न्योछावर करता हूं।
श्यामा श्याम सुख राशि हौं तो हौं युगल दासी ।
श्री राधा कृष्ण आनंद की असीमित राशि हैं। मैं दिव्य युगल की दासी हूँ।
राधा मेरी ठकुरानी वृंदावन रजधानी ।
श्री राधा मेरी स्वामिनी हैं, उनकी राजधानी वृंदावन है।
राधा मेरी ठकुरानी मैं तो राधा की दीवानी ।
मैं अपनी स्वामिनी श्री राधा रानी के प्रेम में डूबी हुई हूं।
राधा मेरी ठकुरानी ब्रह्म करे अगवानी ।
पूर्ण ब्रह्म श्री कृष्ण मेरी स्वामिनी श्री राधा की अगवानी करते हैं।
राधा मेरी ठकुरानी सेवें शम्भु शुक ज्ञानी ।
ज्ञानियों में अग्रगण्य भगवान शिव और शुकदेव जैसे महान अधिकारी भी उनकी सेवा में उपस्थित हैं ।
राधा मेरी ठकुरानी ज्ञानी विज्ञानी अज्ञानी ।
जो श्री राधा से प्रेम नहीं करते वे ज्ञानी होते हुए भी महान मूर्ख हैं।
राधा मेरी ठकुरानी ऊँचे महलन रानी ।
मेरी स्वामिनी श्री राधा रानी एक भव्य और ऊंचे महल में निवास करती हैं।
राधा मेरी ठकुरानी नेति कहे वेद वानी ।
वेद यह कहने में असमर्थ हैं कि श्री राधा तत्व क्या है, वेद भी नेति नेति कहकर अपने को असमर्थ बताते हैं ।
राधा मेरी ठकुरानी स्वामिनी 'कृपालु' मानी ।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी कहते हैं कि मैंने उन्हें अपनी स्वामिनी के रूप में स्वीकार कर चुका हूं ।
- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, ब्रज रस माधुरी 1 (75)

