एक बार अयोध्या जाओ - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (28)

एक बार अयोध्या जाओ - डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (28)

(कवित्त)
एक बार अयोध्या जाओ, दो बार द्वारिका,
तीन बार जाके त्रिवेणी में नहाओगे। [1]
चार बार चित्रकूट, सौ बार नासिक,
बार-बार जाकर बद्रीनाथ घूम आओगे॥ [2]
कोटि बार काशी, केदारनाथ रामेश्वर,
गया-जगन्नाथ, चाहे जहाँ जाओगे। [3]
होंगे प्रत्यक्ष जहाँ दर्शन श्याम श्यामा के,
वृंदावन सा आनन्द कहीं नहीं पाओगे॥ [4]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृंदावन शतक (28)

चाहे कोई एक बार अयोध्या की यात्रा करे, दो बार द्वारिका जाए या तीन बार त्रिवेणी में स्नान कर ले। [1]

चाहे कोई चार बार चित्रकूट जाए, सौ बार नासिक जाए, या बार-बार बद्रीनाथ की यात्रा ही क्यों न कर ले। [2]

चाहे कोई काशी, रामेश्वरम, गया, जगन्नाथ जैसे पावन तीर्थों पर असंख्य बार तीर्थाटन कर ले। [3]

परंतु श्री वृन्दावन धाम के अतिरिक्त कोई अन्य ऐसा स्थान नहीं है, जहाँ युगल सरकार (श्री राधा कृष्ण) के प्रत्यक्ष दर्शन हों और उनका दिव्य मधुर रस सुलभ हो सके। [4]