(राग शहानौ)
“धनि धनि श्रीवृन्दावन धाम”
श्री वृंदावन धाम धन्य है ।
“जाकी महिमा बेद बखानत, सब बिधि पूरण काम”
श्री वृंदावन धाम की महिमा वेद गाकर बखान कर रहे हैं, जो सारी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला है ।
“आश करत है जाकी रज की, ब्रह्मादिक सुर ग्राम”
देवता और ब्रह्मा भी इस श्री वृंदावन धाम की रज की कामना करते हैं ।
“लाडिलीलाल जहाँ नित विहरत, रतिपति छबि अभिराम”
इस श्री वृंदावन धाम में श्री श्यामा श्याम नित्य विहरण करते हैं । जिन्हें देखकर, सारी सृष्टि को मोहित करने वाले कामदेव भी मोहित हो रहे हैं ।
“रसिकनको जीवन धन कहियत, मंगल आठों याम”
यह श्री वृंदावन धाम रसिकों का जीवन प्राण धन है, जो नित्य मंगल प्रदान करने वाला है ।
“नारायण बिन कृपा जुगलवर, छिन न मिलै विश्राम”
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि बिना श्री श्यामा श्याम की कृपा के इस श्री वृंदावन धाम में किसी को भी प्रवेश नहीं है । इनकी कृपा के बिना किसी को भी शांति प्राप्त नहीं होगी ।
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (2)
“धनि धनि श्रीवृन्दावन धाम”
श्री वृंदावन धाम धन्य है ।
“जाकी महिमा बेद बखानत, सब बिधि पूरण काम”
श्री वृंदावन धाम की महिमा वेद गाकर बखान कर रहे हैं, जो सारी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला है ।
“आश करत है जाकी रज की, ब्रह्मादिक सुर ग्राम”
देवता और ब्रह्मा भी इस श्री वृंदावन धाम की रज की कामना करते हैं ।
“लाडिलीलाल जहाँ नित विहरत, रतिपति छबि अभिराम”
इस श्री वृंदावन धाम में श्री श्यामा श्याम नित्य विहरण करते हैं । जिन्हें देखकर, सारी सृष्टि को मोहित करने वाले कामदेव भी मोहित हो रहे हैं ।
“रसिकनको जीवन धन कहियत, मंगल आठों याम”
यह श्री वृंदावन धाम रसिकों का जीवन प्राण धन है, जो नित्य मंगल प्रदान करने वाला है ।
“नारायण बिन कृपा जुगलवर, छिन न मिलै विश्राम”
श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि बिना श्री श्यामा श्याम की कृपा के इस श्री वृंदावन धाम में किसी को भी प्रवेश नहीं है । इनकी कृपा के बिना किसी को भी शांति प्राप्त नहीं होगी ।
- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (2)

