(कवित्त)
श्री राधिकावल्लभ प्यारी फुलवारी माँझ ठाड़ी,
फूलकारी सारी तन सोभित बनाव की। [1]
लोचन विशाल बाँके अनियारे कजरारे,
प्रीतम के प्रान हरै हेरनि सुभाव की॥ [2]
चूरी मखतूल नीलमनिन की कर बनी,
बेसरि सुदेस उर अँगिया कटाव की। [3]
कुंदन की दुलरी अरु मोतिन के हार हियैं
'हित ध्रुव' चारु चौकी लसत जराव की॥ [4]
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत 1 (06)
श्री कृष्ण की प्रिया श्री राधिका वृंदावन की फुलवारी में खड़ी हैं। उनके तन पर आकर्षक फूलों वाली साड़ी सजी हुई है। [1]
श्री राधा के कजरारे, विशाल नयन, जो तिरछी चितवन से कटाक्ष कर रहे हैं, श्री कृष्ण के प्राणों का हरण कर रहे हैं। [2]
उनकी मणि-जड़ित नीली रेशमी चूड़ियाँ उनकी कोमल कलाई पर चमक रही हैं। मोती से बनी बेसर उनकी नासिका में सुंदर सज रही है, और उनके ह्रदय पर कंचुकी खूबसूरती से सजी हुई है। [3]
श्री ध्रुवदास जी कहते हैं, "कुंद के फूलों, विभिन्न मोतियों और कीमती रत्नों से बनी कई मालाएँ श्री राधा के गले में शोभा पा रही हैं।" [4]
श्री राधिकावल्लभ प्यारी फुलवारी माँझ ठाड़ी,
फूलकारी सारी तन सोभित बनाव की। [1]
लोचन विशाल बाँके अनियारे कजरारे,
प्रीतम के प्रान हरै हेरनि सुभाव की॥ [2]
चूरी मखतूल नीलमनिन की कर बनी,
बेसरि सुदेस उर अँगिया कटाव की। [3]
कुंदन की दुलरी अरु मोतिन के हार हियैं
'हित ध्रुव' चारु चौकी लसत जराव की॥ [4]
- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, श्रृंगार शत 1 (06)
श्री कृष्ण की प्रिया श्री राधिका वृंदावन की फुलवारी में खड़ी हैं। उनके तन पर आकर्षक फूलों वाली साड़ी सजी हुई है। [1]
श्री राधा के कजरारे, विशाल नयन, जो तिरछी चितवन से कटाक्ष कर रहे हैं, श्री कृष्ण के प्राणों का हरण कर रहे हैं। [2]
उनकी मणि-जड़ित नीली रेशमी चूड़ियाँ उनकी कोमल कलाई पर चमक रही हैं। मोती से बनी बेसर उनकी नासिका में सुंदर सज रही है, और उनके ह्रदय पर कंचुकी खूबसूरती से सजी हुई है। [3]
श्री ध्रुवदास जी कहते हैं, "कुंद के फूलों, विभिन्न मोतियों और कीमती रत्नों से बनी कई मालाएँ श्री राधा के गले में शोभा पा रही हैं।" [4]

