मृदु मुसकान निहारि के - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (111)

मृदु मुसकान निहारि के - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (111)

मृदु मुसकान निहारि के, धीर धरत है कौन।
नारायण कै तन तजै, कै बौरा के मौन॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (111)

श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि श्री राधारानी की मधुर मुस्कान का दर्शन कर ऐसा कौन है, जिसे अपने तन की सुधि बनी रहे, जो बौराया न जाए या मौन न हो जाए।