वृन्दावन वैकुण्ठ कों, तोल्यौ तुलसी दास - श्री तुलसीदास जी महाराज

वृन्दावन वैकुण्ठ कों, तोल्यौ तुलसी दास - श्री तुलसीदास जी महाराज

वृन्दावन वैकुण्ठ कों, तोल्यौ तुलसी दास।
गरूऔ हो सो थिर रह्यो, हलकौ गयौ अकास॥

- श्री तुलसीदास जी महाराज

श्री तुलसीदास जी महाराज कहते हैं कि जब उन्होंने श्री वृन्दावन धाम और वैकुण्ठ धाम को उनके रस से तौला, तो दोनों में ज़मीन-आसमान का अंतर पाया। श्री वृन्दावन धाम तराज़ू में नीचे रहा और वैकुण्ठ धाम न जाने कहाँ आकाश में चला गया। वृन्दावन-रस के समान कोई रस कहाँ!