मेरे बल श्रीवृन्दावन रानी - श्री हित रूपलाल जी

मेरे बल श्रीवृन्दावन रानी - श्री हित रूपलाल जी

मेरे बल श्रीवृन्दावन रानी।
जाहि निरंतर सेवत मोहन बन विनोद सुखदानी।।
जिनकी चरण कृपा तें पाई कुंज केलि रस सानी।
जय श्री रूपलाल हित हाथ बिकानी निधि पाई मन मानी।।

- श्री हित रूपलाल जी

मेरा बल एकमात्र श्री राधा हैं जो श्री वृंदावन धाम की महारानी हैं। 
मेरी राधारानी, प्रेम की प्रदायिनी हैं, जो दिन-रात वृन्दावन की कुञ्जों में श्रीकृष्ण द्वारा सेवित हैं ।
जिनके चरणों की कृपा से ही केवल वृंदावन के आनंदमय रस, अंतरंग केली लीलाओं को प्राप्त किया जा सकता है । 
श्री हित रूपलाल कहते हैं, "मैंने खुद को उनके पास बेच दिया है, और उन्होंने मेरी इच्छा के अनुसार, मुझे अमूल्य निधि प्रदान कर दिया है।"