हम चाकर राधा रानी के - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, होली (11)

हम चाकर राधा रानी के - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, होली (11)

हम चाकर राधा रानी के।
ठाकुर श्री नंद नंदन के, वृषभानु लली ठकुरानी के ॥ [1]
निरभय रहत वदत नहिं काहू डर नहिं डरत भवानी के।
'हरीचंद’ नित रहत दीवाने, सूरत अजब दीवानी के ॥ [2]

- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, होली (11)

हम श्री राधारानी की नित्य दासी हैं । हम हमेशा श्री जुगल किशोर की सेवा में उपस्थित हैं ।
हमारे राजा श्री कृष्ण हैं, और हमारी रानी श्री राधारानी हैं । [1]

इस प्रकार मैं हमेशा निर्भय रहता हूँ और मुझे किसी भी देवी देवता या ग्रहों का भय नहीं है। यहाँ तक कि मुझे भयानक देवी का भी भय नहीं है ।
श्री हरिचंदन कहते हैं, "हम नित्य श्री जुगल किशोर की केलि लीला के महाप्रेम रस के नशे में छके रहते हैं"। [2]